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फरीदाबाद:- किडनी रैकेट में फोर्टिस हॉस्पिटल की कोऑर्डिनेटर हुई गिरफ्तार

किडनी रैकेट में उत्तर प्रदेश पुलिस ने फरीदाबाद के फोर्टिस अस्पताल में काम करने वाली सोनिका नाम की एक महिला कर्मचारी को गिरफ्तार किया है। ये कुछ साल से हॉस्पिटल में अंग प्रत्यारोपण की कोऑर्डिनेटर है। पुलिस ने जांच-पड़ताल के लिए पिछले हफ्ते इस महिला को नोटिस देकर कानपुर बुलाया था।  इस मामले में अब तक 12 लोग पकड़े जा चुके हैं।

वहीं हाल ही में पिछले शनिवार को राजधानी दिल्ली के पुष्पावती सिंहानिया रिसर्च इंस्टीट्यूट के सीईओ डॉ. दीपक शुक्ला की भी गिरफ्तारी हुई थी। इन्होंने मानव अंगों की खरीद-फरोख्त की बात कबूली थी।

कानपुर के एसपी राजेश यादव ने बताया कि जांच के दौरान पीएसआरआई में अवैध तरीके से किडनी प्रत्यारोपण के सबूत मिले थे। बिचौलियों की मदद से यहां गरीब लोग लाए जाते थे और फर्जी पैथोलॉजी रिपोर्ट तैयार कर कागज बनाए जाते थे।

एसएसपी ने बताया कि फरीदाबाद के फोर्टिस अस्पताल में ट्रांसप्लांट संबंधी दो फाइलें मिली हैं। इन फाइलों में जिन किडनी डोनर और रिसीवर के नाम दर्ज हैं, जांच के बाद वह दोनों ही फर्जी पाए गए। इनमें एक फाइल पर तीरथ पाल और दूसरे पर अरुण कुमार का नाम था। दोनों का ही पता अलीगढ़ दर्शाया गया था। जांच के बाद फाइल में दर्शाए गए दोनों ही रिसीवर फर्जी निकले। इसके अलावा फाइल में दर्ज दोनों डोनर भी फर्जी निकले।

किडनी रैकेट की जांच कर रहे कानपुर के एसपी क्राइम राजेश यादव ने ये भी  बताया कि सोमवार को सोनिका डबास से कई घंटे पूछताछ की गई थी। शाम को उन्हें भेज दिया गया। मंगलवार को उन्हें फिर से पूछताछ के लिए बुलाया गया था। इस दौरान पुलिस ने उनके बयान और मौजूदा सुबूतों का मिलान किया तो कई मामलों में सोनिका की भूमिका संदिग्ध नजर आई। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

जानकारी के मुताबिक, अस्पताल के मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि फोर्टिस हेल्थकेयर इस तरह के गलत कार्यों का बिलकुल पक्षधर नहीं है। पुलिस और जांच अधिकारी को पूरा सहयोग किया जाएगा। एक जिम्मेदार संस्थान होने के नाते हम मानव अंग प्रत्यारोपण एक्ट और नियमों का पूरी तरह से पालन करते हैं।

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