बुआ और बबुआ की जोड़ी कितनी सफल हो पाएगी !

मिले मुलायम कांशीराम हवा हो गए जय श्रीराम का नारा याद है न आपको। ठीक ऐसा ही कुछ उत्तर प्रदेश में दोबारा दोहराया जा सकता है। लेकिन इस बार भगवा को हराने के लिए बुआ और बबुआ साथ आगये है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है की क्या यह जोड़ी 1990 के दशक की तरह कामयाब हो पाएगी। क्यूंकि इस वक़्त न तो मुलायम है और न ही कांशीराम और वहीँ बीजेपी भी 1990 वाली नहीं है।

तो हम आपको समझाते है की कैसे अखिलेश और मायावती की जोड़ी बीजेपी को उत्तर प्रदेश में रोक सकती है। सबसे पहले हम आप महागठबंधन की बात करे तो बसपा 38, सपा 38 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। जबकि 2 सिट सहयोगियों के लिए छोड़ दिया गया है। वहीं सपा अपने कोटे से निषाद पार्टी और पीस पार्टी को एक-एक सीट देगी। निषाद पार्टी गोरखपुर की सीट से चुनाव लड़ेगी और पीस पार्टी को खलीलाबाद लोकसभा सीट दिया जाएगा। कांग्रेस को इस गठबंधन से बहार रखा गया है लेकिन फिर भी महागठबंधन की ओर से दो सीटों रायबरेली और अमेठी पर प्रत्याशी नहीं उतारा जाएगा। अगर ओम प्रकाश राजभर एनडीए छोड़कर आते हैं तो सपा उन्हें भी अपने कोटे से दो सीट देगी।

पिछले उपचुनावों के हाल

अगर मार्च 2018 में हुए उपचुनाव की बात करे तो 23 साल से एक दुसरे से नफरत करने वाली सपा और बसपा एक साथ बीजेपी को हराने के लिए साथ आई और वो कामयाब भी हो गए। अगर दोनों की जोड़ी बात करे तो दोनों ने बीजेपी को उनके गढ़ गोरखपुर में मात दिया था। गोरखपुर की बात करे तो सपा और बसपा की जोड़ी को 48.87 % वोट मिले वहीँ बीजेपी को 46.53% वोट मिले। वहीँ अगर हम फूलपुर की बात करे तो वहां दोनों की जोड़ी ने बहुत बड़े अंतर से मात दे दिया है। फूलपुर में बसपा और सपा ने 46.95% वोट हासिल की जबकि भाजपा को महज 38.81% वोट मिले थे। यह जीत इस लिए संभव हो पाई क्यूंकि दोनों पार्टियां एक साथ लड़ी।

2014 लोक सभा के नतीजे        

अगर हम लोक सभा 2014 के नतीजे की बात करे तो बीजेपी और उसके सहयोगियों को 43.3% वोट मिले जबकि सपा को 22.4% वोट , बसपा को 19.8% वोट और कांग्रेस को 7.5% वोट मिले थे। जिस कारण एनडीए 80 में से 73 सीटें जीत सकी। अगर 2014 में ही बीजेपी के खिलाफ अगर सपा और बसपा का गठबंधन बन गया होता तो वोटें बटती नहीं और इनके गठबंधन को 43.1% वोट मिलती और इनको कुल 43 सीटें मिल सकती थी और बीजेपी मात्र 35 सीटों पर रह जाती। जिसके बाद बीजेपी को बहुमत पाने में काफी जदों जहत करनी पर जाती ।

वहीँ अगर हम 2017 के विधानसभा के नतीजों पर ध्यान दे तो बीजेपी को 41.4% वोट मिली थी जबकि बसपा को 22%, सपा को 21.8% और कांग्रेस को 6.2% वोट मिले थे। अगर उस चनाव में भी गठबंधन एक साथ आजाता तो उन्हें कुल 45.6% वोट मिल जाती जो बीजेपी से ज्यादा होते। और सरकार कहीं न कहीं गठबंधन की बनती।

सर्वे रिपोर्ट के अनुसार महागठबंधन आगे

दिसंबर 2018 में C Voter के सर्वे ने बताया था की अगर अभी चुनाव होंगे तो बीजेपी महागठबंधन से पिछड़ती नजर आ रही है। अगर चुँव हुए तो गठबंधन को 42,  एनडीए को 36 जबकि कांग्रेस को 2 सीटें मिलेंगी।

5% वोट स्विंग से उत्तर प्रदेश से साफ हो जायेगी बीजेपी

अगर हम 2017 में बीजेपी को मिले वोट और गठबंधन को मिले वोट को अगर लोकसभा चुनाव के तौर पर देखे तो नतीजे कुछ इस प्रकार होती बीजेपी को 41.4% वोटों के साथ महज 26 सीटें जीत पाती। वहीँ 45.6% वोट के साथ गठबंधन 52 सीटें जीत पाती।

मान लीजिये की 2017 में 3 फिसद वोट बीजेपी के गठबंधन को मिल जाते तब बीजेपी की वोट शेयर 38.4% होती और उसके पाले में 17 सीटें ही आ पाती। वहीँ गठबंधन के वोट शेयर बढ़कर 48.6% वोट हो जाते और उनके खाते में 62 सीटें आती।

अब मानिए की 5% वोट 2017 में गठबंधन को मिल जाते तब उनकी वोट शेयर बढ़कर 50.60%हो जाते तब गठबंधन को 70 सीटें मिल पाती वहीँ बीजेपी का वोट शेयर गिरकर 36% पर आ जाता जिस कारण सीटें महज 9 उनके खाते में आते।

इन आकड़ों से एक उम्मीद तो जरुर गठबंधन लगा सकती है की `1993 को दोहराया जा सकता है। लेकिन कांग्रेस का अकेला लड़ना भी एंटी बीजेपी वोट बाट देगा। फिलहाल यह तो पुराने आकड़ों से किया गया आकलन है। नतीजा क्या होगा यह तो चुनाव में बाद ही पता चलेगा।     

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Deepak Prakash

Deepak Prakash is an Indian Journalist. He is an alumni of ISOMES News 24. with more than one year of experience in digital media. he had worked For many media Houses including Broadcast channels and has been always associated to News 24 . currently he heads the Sports and international desk for Khabarinfo .

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