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जानिए राफेल डील से जुड़े अहम् बातें जिसने भारत में राजनीति को नयी दिशा दे दी है

राफेल डील यानी पिछले कुछ दशकों में भारत सरकार द्वारा किया गया सबसे बड़ा रक्षा सौदा जिसने भारत में राजनैतिक उठा पटक ला दी है।  (Rafale Deal) को लेकर फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के खुलासे के बाद मचे घमासान के बीच फ्रांस सरकार और डसॉल्ट एविएशन का भी बयान आ गया है। जिसने ओलांद के बयान से किनारा कर लिया है। तो चलिए आपको राफेल डील  पॉइंट्स में समझाते है।

  1. भारत में जरुरत के हिसाब लड़ाकू विमानों को खरीदने की पहल पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी। जोकि 126 लड़ाकू विमानों की थी।
  2. 2004 में अटल जी सरकार चली जाती है और भारत में कांग्रेस सत्ता में आती है। तब अगस्त 2007 में यूपीए सरकार में तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटोनी ने 126 एयरक्राफ्ट की खरीदने की मंजूरी दे दी। जिसके बाद कई विदेशी कंपनी आपने अपने दावे पेश किये।
  3. भारत के इस लड़ाकू विमान के खरीद फ़रोख में लड़ाकू विमानों की रेस में अमेरिका के बोइंग एफ/ए-18ई/एफ सुपर हॉरनेट, फ्रांस का डसॉल्‍ट राफेल, ब्रिटेन का यूरोफाइटर, अमेरिका का लॉकहीड मार्टिन एफ-16 फाल्‍कन, रूस का मिखोयान मिग-35 और स्वीडन के साब जैस 39 ग्रिपेन जैसे एयरक्राफ्ट शामिल थे, लेकिन बाजी डसाल्ट एविएशन के राफेल ने मारी।
  4. इन सभी में फ्रांस के राफेल को दिया गया क्यूंकि यह काफी सस्ता और रख राखव में में कम करचे वाला था । और भारतीय वायु सेना ने साल 2011 तक इसकी परिक्षण और जांच की।
  5. फिर साल 2011 में वायुसेना ने इसे ग्रीन लाइट दे दी। जिसके ठीक अगले साल यानी 2012 में राफेल को बिडर घोषित किया गया और इसके उत्पादन के लिए डसाल्ट ए‍विएशन के साथ बातचीत शुरू हुई। लेकिन साल 2014 आते आते भी पूरी नहीं हो पायी।
  6. फिर साल 2014 में भारत की राजनीति में नयी शुरुआत होती है। जिसमे नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद राफेल (Rafale Deal) पर फिर चर्चा शुरू हुई। 2015 में पीएम मोदी फ्रांस गए और उसी दौरान राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर समझौता किया गया। लेकिन यह डील 126 राफेल की न होकर 36 राफेल की हुई।
  7. जिसके बाद कांग्रेस ने खुले तौर पर विरोध कारने उतर गयी कांग्रेस ने दावा किया कि यूपीए ने 126 विमानों के लिए 54,000 करोड़ रुपये में सौदा पटाया था। अब मोदी सरकार सिर्फ 36 विमानों के लिए 58,000 करोड़ रुपये रही है।
  8. कांग्रेस ने आगे खुलासा करते हुए कहा कि नए समझौते के तहत एक राफेल विमान 1555 करोड़ रुपये का पड़ रहा है। जबकि कांग्रेस ने 428 करोड़ रुपये में डील तय की थी। कांग्रेस का इस डील में अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस को शामिल करने का भी विरोध कर रही है। पार्टी का कहना है कि सरकारी कंपनी HAL की जगह जानबूझ कर रिलायंस को डील में शामिल किया गया।
  9. कांग्रेस के विरोध के बाद वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने शनिवार को दावा किया कि राफेल लड़ाकू विमान सौदा ‘‘इतना बड़ा घोटाला है जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते’’। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑफसेट करार के जरिये अनिल अम्बानी के रिलायंस समूह को ‘‘दलाली (कमीशन)’’ के रूप में 21,000 करोड़ रुपये मिले।
  10. राफेल डील (Rafale Deal) पर मचे घमासान के बीच अब फ्रांस्वा ओलांद ने नया खुलासा किया है। फ़्रेंच अखबार को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा है कि अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस का नाम खुद भारत सरकार ने सुझाया था। हालांकि फ्रांस सरकार और डसाल्ट ने इससे किनारा किया है, लेकिन विपक्ष के आरोपों को बल मिल गया है।

Deepak Prakash

Deepak Prakash is an Indian Journalist. He is an alumni of ISOMES News 24. with more than one year of experience in digital media. he had worked For many media Houses including Broadcast channels and has been always associated to News 24 . currently he heads the Sports and international desk for Khabarinfo .