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नोटबंदी के बाद 50 लाख लोगों ने धोएं नौकरी से हाथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नवबंर साल 2016 में लिया नोटबंदी के फैसले ने कई लोगो की नींद छीन ली तो कई लोग इस फैसले से खुश हुए। अगर बात की जाएं बेरोजगारी की तो बेराजगारी अभी समाप्त नहीं हुई है। अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी (बेंगलुरू) की रिपोर्ट के अनुसार पीएम मोदी का लिया नोटबंदी के फैसले से साल 2016 से साल 2018 के बीच 50 लाख लोगों ने नौकरी से हाथ धोंए हैं।

साल 2016 में पीएम मोदी ने अचानक से 1000-500 के नोट बंद कर किए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2016 के सितंबर  से दिसंबर 2016 के बीच शहर के और गांव के लोगों की लेबर पार्टिशिपेशन फोर्स में हिस्सेदारी कम होने लगी। इसका मतलब है कि सितंबर 2016 नौकरियों में कमी आने लगी। ऐसे ही नौकरियों की संख्या लगातार कम होती गई, जिसमें कोई सुधार नहीं हुआ। भारत में 20 से 24 साल की उम्र के लोगों के बीच नौकरी का संकट सबसे ज्यादा है। नोटबंदी से पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा प्रभावित हुई हैं।

रिपोर्ट्स में यह भी है कि भारत में बेरोजगार ज्यादातर शिक्षित और युवा हैं। शहरी महिलाओं में कामगार जनसंख्या में 10 फीसदी ही ग्रेजुऐट हैं, जबकि 34 फीसदी बेरोजगार हैं। वहीं, शहरी पुरुषों में 13.5 फीसदी ग्रेजुएट्स हैं, मगर 60 फीसदी बेरोजगार हैं। राजनीतिक एक्सपर्ट्स की मानें तो यह रिपोर्ट ऐसे समय पर आई है, जब देश आम चुनाव की प्रक्रिया से गुजर रहा है। अब इससे विपक्षी दल मोदी सरकार पर रोजगार को लेकर जमकर हमला बोल सकता है।

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