गिरते रुपये के साथ-साथ देश की साख भी गिरती जा रही है-बाबा रामदेव

योगगुरू रामदेव बाबा पर हमेशा से यह आरोप लगाए जाते है कि वह मोदी सरकार का समर्थन करते है लेकिन इस बार बाबा रामदेव ने मोदी सरकार पर हमला किया है।और सरकार को लगातार डॉलर के मुकाबले गिरते रूपये के मुद्दे पर घेरते हुए कहा है कि रुपयें के साथ साथ हमारी साख भी गिरती जा रही है।

बाबा ने कहा कि विदेशी कंपनियां भारत में पैसा कमाकर सारा धन अपने देश ले जाती है। यही हाल रहा जल्द ही एक डॉलर की कीमत 80 रुपये के बराबर भी हो जाएगी।

रामदेव ने कहा कि कोलगेट जैसी कंपनियां यहां कमाकर सारा धन अपने देश ले जाती हैं। कोलगेट ने देश में कौन सी गोशाला, विद्यालय, अस्पताल खोल दिए हैं? आज वो पूछ रहे हैं कि आपके पेस्ट में नमक है? आज उन्हें नमक, नीम और बबूल याद आ रहा है। अपने देश का रुपये अपने देश में होना चाहिए। और अब तो रुपये का इतना बुरा हाल हो गया है। रुपया ही नहीं गिरा, देश की साख भी गिरी है।

बाबा ने कहा कि देश को मजबूत करने के लिए देश के हर नागरिक को, चाहे वो किसान हो, जवान हो, बिजनेसमैन हो, जो जहां पर है, वहां दो-दो हाथ अगर काम पर लग जाएंगे तो वे अपनी मेहनत से बिना किसी राजनीतिक दल के एक नया भारत बना लेंगे। तभी जाकर रुपये का अवमूल्यन रुकेगा।

योगगुरु ने कहा कि आज डॉलर के सामने रुपये की कीमत 70 हो गई है। हो सकता है कि कल 80 रुपये देकर हमें एक डॉलर खरीदना पड़े। जब हिन्दुस्तान आजाद हुआ था, उस समय रुपया और डॉलर एक बराबर था।

गौरतलब है कि बाबा रामदेव ने अपना कारोबार बढ़ाते हुए आज पतंजलि का दूध और पनीर भी लॉन्च कर दिया।

बाबा रामदेव ने कहा, ‘यह सच बात है कि कुछ दिन पहले तक क्रूड ऑयल के दाम निचले स्तर पर थे, अभी थोड़ा सा बढ़ा है। उसके बावजूद भी यदि टैक्स कम कर दिया जाए तो तेल के दाम कर हो सकते हैं। पेट्रोल-डीजल के दामों में जो आग लगी हुई है, अगर इसका टैक्स खत्म कर दिया जाए तो आज भी 40 रुपये में डीजल-पेट्रोल मिल सकता है।’

अंत में उन्होंने मोदी जी से आशा भी जगाई और कहा कि  मोदी जी अभी सही सलामत हैं, न वो बहरे हैं, न गूंगे हैं, मुझे लगता है वो जरूर सुन भी रहे हैं। आज भी सुन रहे होंगे और आगे भी हम उन्हें सुनाएंगे। उन्होंने कहा कि 2019 का महासंग्राम नजदीक है। उससे पहले उनको ये महंगाई की आग बुझानी पड़ेगी, नहीं तो यह आग उन्हें बहुत महंगी पड़ेगी।

खैर बाबा रामदेव के इस बयान से यह साफ लगता है कि वह भी देश में रुपये की गिरती हालत और बढ़ते पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों से कितने नाराज़ है।और उनकी वातों से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि सरकार पेट्रोल-डीज़ल की कीमते जरुर कर सकती है लेकिन कर नहीं रही है।

 

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