आम नागरिक और सेना को छोड़ अब आतंकियों के निशाने पर है ये लोग

समय के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के हालात बेकार होते जा रहे हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने के अपने मकसद को कामयाब करने के लिए आतंकी अपनी सारी हदे पार कर रहे हैं। पहले तो आतंकी आम आदमी और सेना को अपना निशाना बनाते थे पर अब लगता है उनका इतने में मन नहीं भरा तभी तो आम नागरिक और सेना को निशाना बनाने के बाद अब आतंकियों के निशाने पर पुलिसकर्मियों के घरवाले और उनके रिश्तेदार आ गए हैं।

दरअसल घाटी में सुरक्षाबलों की कार्रवाई से बौखलाए आतंकी संगठनों ने अब पुलिसकर्मियों के परिवार को निशाना बनाना शुरू किया है। जानकारी के मुताबित बीते दो दिनों के अंदर अज्ञात आतंकियों के समूह ने कश्मीर घाटी के अलग-अलग जिलों से लगभग 9 लोगों को अगवा किया है। वैसे तो जम्मू-कश्मीर पुलिस के आईजीपी स्वयं प्रकाश पाणि ने इन घटनाओं की पुष्टि नहीं की है। इस बात पर उन्होंने कहा है कि पुलिस अभी तथ्यों की जांच कर रही है।

सूत्रों ने अनुसार अगवा किए गए सभी लोग अलग-अलग पुलिसकर्मियों के रिश्तेदार बताए जा रहे हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि पुलिसकर्मियों के पारिवारिक सदस्यों का अपहरण होने के बाद अब सेना बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाकर इनकी तलाश में जुटी हुई है।

* महबूबा मुफ्ती के गृहक्षेत्र में हुई अपहरण की घटना-  असल में स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अज्ञात आतंकियों ने दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के अरवानी बिजबेहड़ा में रहने वाले आरिफ अहमद शंकर नाम के एक युवक को अगवा किया है, जिनके भाई नजीर अहमद यहां जम्मू-कश्मीर पुलिस में एसएचओ हैं। वही दूसरी ओर आतंकियों ने अरवानी से जुबैर अहमद भट का भी अपहरण किया है। बता दे इनके पिता मोहम्मद मकबूल भट जम्मू-कश्मीर पुलिस में हैं।

* कुलगाम और गांदरबल जिले में भी अपहरण-   इतना ही नहीं दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले से आतंकियों ने खारपोरा निवासी पुलिसकर्मी बशीर अहमद के बेटे फैजान और येरीपोरा निवासी पुलिसकर्मी अब्दुल सलेम के बेटे सुमेर अहमद, काटापोरा के डीएसपी एजाज अहमद के भाई गौहर अहमद के भी अगवा किए जाने की सूचना मिली है। वही इन सब के अलावा मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले में भी एक पुलिसकर्मी के रिश्तेदार की अगवा कर पिटाई की गई है।

* पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच हुई घटनाएं –  मीडिया रिपोर्ट की माने तो आतंकियों की यह कार्रवाई उस वक्त हुई थी, जब केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में पंचायत के चुनाव को लेकर काफी सक्रियता तरीके से तैयारी कर रही थी। ऐसा बताया जा रहा है कि पुलिसकर्मियों के पारिवारिक सदस्यों के अपहरण की घटनाओं के सामने आने के बाद सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस की टीमें अलग-अलग जिलों में इन सब की तलाश करने में जुटी हुई हैं। वही ऐसा माना जा रहा है कि आतंकी संगठन कश्मीर में पंचायत चुनाव से पहले दहशत फैलाकर चुनावी प्रक्रिया को बाधित करना चाहते हैं।

 

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