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2019 में मोदी नहीं बल्कि नितिन गडकरी को मिल सकता है प्रधानमंत्री बनने का मौका

मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के अलावा 11 उपचुनावों में बीजेपी को महज एक में जीत मिली है। जिसके बाद यह कहना गलत नहीं होगा कि मोदी का जादू खत्म हो गया है। जिसके बाद राजनेतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बीजेपी भले ही 2019 में सरकार बना ले लेकिन मोदी का पीएम बनना बहुत मुश्किल से भी ज्यादा मुश्किल है। ये भी माना जा रहा है कि मोदी अगर पीएम नहीं बने तो राहुल गांधी भी प्रधानमंत्री बनने की हालत में नहीं होंगे।

तो सबसे बड़ा सवाल उठता है कि आखिर मोदी का विकल्प कौन है। जवाब एक ही है इस वक्त आरआरएस के चाहिते नितिन गडकरी।       

नितिन गडकरी को एक संगठन चलाने का खासा अनुभव है। वो बीजेपी के अध्यक्ष भी रह चुके है और संगठन को दोबारा खड़ा किया जिस वक़्त अटल बिहारी वाजपयी राजनेतिक संन्यास लिया। इसके अलवा नितिन गडकरी के ऊपर कोई कोई सांप्रदायिक दाग भी नहीं है। और साथ ही नागपुर से होने कि वजह से वह संघ के चहेते भी है।

इस मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार अमिया मोहान लिखते है – “अगर 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की सीटें 200 या उससे नीचे रहीं तो नरेंद्र मोदी पीएम नहीं बन पाएँगे। सबसे ज़्यादा सीटें बीजेपी को मिलेंगी लेकिन वो सरकार बनाने की हालत में नहीं होगी। ऐसे हालात में नितिन गडकरी पीएम बन सकते हैं।

संघ को मोदी बिलकुल रास नहीं आ रहे लेकिन इस टर्म तक संघ मोदी को झेल रहा है, बस। संघ चाहता है किसी हाल में गडकरी ही अगले प्रधानमंत्री हों। उनमें पैसा जुटाने से लेकर हर वो ख़ूबी है जो एक संगठन को चाहिये। और हाँ, उनपर सांप्रदायिक होने का ठप्पा भी नहीं है। विकास पुरुष की छवि तो ख़ैर है ही।।।हाइवे बनवाने को लेकर उन्होंने बहुत ख्याति कमायी है। बाकी, चुनाव आजकल आख़िर के पंद्रह दिनों में तय होते हैं।“

अगर हम मोदी के नेतृत्व म देखे तो कई पार्टियों ने एनडीए से नाता तोड़ा तो है ही इसके अलवा खुद मोदी पर निशाना साधा है। जिसमे चंद्र बाबू नायडू की टीडीपी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना सबसे ऊपर है।शिवसेना ने तो 2019 में अकेले लड़ने कि बात तक कर दी है।

अगर मायावती और अखिलेश उत्तर प्रदेश में गठबंधन बनाने में कामयाब हो जाते है तो बीजेपी के लिए 200 का अकड़ा पार करना बहुत मुस्किल हो जाएगा। जिसके बाद बीजेपी को सबसे ज्यादा जरुरत पड़ेगी सहयोगी दलों की  लेकिन पिछले 4 सालों में उनके साथ जिस तरह से बर्ताव किया गया है। उनका मोदी के नाम पर समर्थन देना मुमकिन नहीं लगा तब वह नितिन गडकरी को जरुर समर्थन दे सकते है। उद्धव ठाकरे के भी उनसे अच्छे रिस्श्ते है और नितीश कुमार के भी। साथ ही 2019 मे नवीन पटनायक कि अहम् भूमिका हो जाएगी जिसको सिर्फ गडकरी अपने साथ ला सकते है।

यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस साल की शुरुआत में एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली में किए गए कार्यों के लिए व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद दिया था। महाराष्ट्र में एनसीपी के सहयोगी और विरोधी उनके साथ कोई समस्या नहीं रखते हैं।

तीन राज्यों में चुनाव में मिली हार के शाह को दी सीधी चुनोती

तीन राज्यों में हुए विधानसभा चुनावी हार की जिम्मेदारी से लेकर अब देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की तारीफ तक गडकरी के बयानों ने चर्चा बटोरी है। ये बयान सिर्फ सुर्खियों तक ही सीमित नहीं रहे क्योंकि इन्हें सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ आवाज के तौर पर माना जा रहा है।

आपको बता दें 24 दिसंबर को एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, ”यदि मैं पार्टी का अध्यक्ष हूं और मेरे सांसद और विधायक अच्छा नहीं करते हैं तो कौन जिम्मेदार होगा?

गडकरी के इन आक्रमक तेवर को देख तो यही लगता है खुद बीजेपी में सब कुछ सही नहीं चल रहा है। इसके अलावा संघ ने एक तरह से अपने पुराने और सबसे खास गडकरी को अपना पूरा समर्थन दे दिया है।   

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Deepak Prakash

Deepak Prakash is an Indian Journalist. He is an alumni of ISOMES News 24. with more than one year of experience in digital media. he had worked For many media Houses including Broadcast channels and has been always associated to News 24 . currently he heads the Sports and international desk for Khabarinfo .