क्यों खटक सकते हैं भाजपा की नजरों में वित्त मंत्री अरुण जेटली?

केंद्र में मंत्रालय संभल रहे भाजपा के बड़े नेताओं के काम से निराश आरएसएस के सर्वे में जो दूसरे बड़े मंत्री का नाम है वो है भाजपा के वरिष्ट नेता और वित्त मंत्रालय संभाल रहे अरुण जेटली।

Khabar Info के शुक्रवार के खबर के मुताबिक आरएसएस ने न्यूजीलैंड की एक कंपनी से भारत में एक ऐसा सर्वे करवाया है जिसमें ये पता लग पाया है की देश की जनता भाजपा के किन कामों से नाखुश है। इस सर्वे का मुख्य उद्देश 2019 में भाजपा के लिए सही दिशा में काम करने के लिए कराया गया था। लेकिन आरएसएस को सर्वे के परिणामों से हर जगह सिर्फ निराशा ही मिली है।

Khabar Info ने कल आरएसएस द्वारा भाजपा पर विदेश मंत्री सुषमा को मंत्रालय से बर्खास्त कर उन्हें ऐसे स्थान देने के बारे में बताया था, जहां से वो 2019 के चुनावों पर ज्यादा असर ना दिखा पाए।

Khabar Info ने सुषमा को हटाना का सूत्रों से मिला सटीक कारण भी बताया था। ठीक वैसे ही सूत्रों से मिली जानकारी द्वारा हम आज आपको बताने जा रहे हैं की कैसे और क्यों भाजपा पर आरएसएस अरुण जेटली को मंत्रालय से बर्खास्त कर उन्हें राजनीति से संन्यास लेने को प्रेरित कर सकता है।

अरुण जेटली 1991 में भाजपा से जुड़े थे जिसके बाद उन्हें साल 2009 में एलके अडवाणी द्वरा कांग्रेस सरकार में लीडर ऑफ़ ओपोजिसन चुना गया। जेटली वर्तमान की भाजपा सरकार में वित्त मंत्रालय संभाल रहे हैं जिनसे देश उतना प्रभावित नहीं हो पाया है।

क्या है वो कारण जो आरएसएस को पसंद नहीं आए –

  • नोटबंदी:

भारत सरकार ने 8 नवम्बर 2016 को एक ऐतेहासिक फैसला लिया जिसमे सरकार ने ब्लैक मनी पर सिकंजा कसने के मंशे से तत्कालीन 500 और 1000 के नोटों को बंद कर दिया। भारत सरकार द्वारा रातों रात इस फैसले से देश में उथल पुथल मच गई। कुछ घंटों के भीतर ही पुरे देश में कही भी 500 और 1000 के नोटों का लेन देन बंद हो गया। लोगों के पास बाज़ार या दुकानों से सामान खरीदने का कोई साधन नहीं रहा, ऐसे में जनता को बहुत से परेशानियों का सामना करना पड़ा। लगभग 3 या 4 दिनों तक पुरे देश में कही भी पैसे नहीं थे। फिर जब नए नोट एटीएम में आने शुरू हुए तो लोग उनपर टूट पड़ते और चंद मिनटों में एटीएम खली हो जाता। ऐसे में लोगों को घंटो एटीएम के बहार लाइन लगा कर पैसों का इंतज़ार करना पड़ता। कुल मिला कर देखा जाए तो नोटबंदी में जो सबसे बड़ी चुक हुई वो बिना किसी प्लानिंग के इसे लागु करना था। अगर सरकार नोटबंदी का ऐलान करने से पहले सभी जगह नए नोट पहुंचा देते तो देश में दिक्कतें नहीं हो पाती। ऐसे में ये सरकार और खास तौर पर वित्त मंत्रालय की बड़ी चुक है। नोटबंदी से भाजपा की छवि पर बुरा असर पड़ा है और यही वजह है की आरएसएस भाजपा पर अरुण जेटली के खिलफ कुछ दबाव बना सकता है।

  • जीएसटी:

1 जुलाई 2017 से पूर्व किसी भी सामान पर केंद्र एवं राज्य सरकार के द्वारा कई तरह के अलग-अलग कर लगाती हैं लेकिन जीएसटी आने से सभी तरह के सामानों पर एक जैसा ही कर लगाया गया। पूर्व में किसी भी सामान पर 30 से 35% तक कर देना पड़ता था कुछ चीजों पर तो प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से लगाया जाने वाला कर 50% से ज्यादा होता था जीएसटी आने के बाद यह कर अधिकतम 28 प्रतिशत हो जाएगा जिसमें कोई भी अप्रत्यक्ष कर नहीं होगा जीएसटी भारत की अर्थव्यवस्था को एक देश एक कर वाली अर्थव्यवस्था बना देगा। फिलहाल भारतवासी 17 अलग-अलग तरह के कर चुकाते हैं जबकि जीएसटी लागू होने के बाद केवल एक ही तरह का कर दिया जाएगा इसके लागु होते ही एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, वैट, मनोरंजन कर,  लग्जरी कर जैसे बहुत सारे कर खत्म हो जाएंगे। मगर भारतवासियों को ये टैक्स सिस्टम इतना पसंद नहीं आया। जीएसटी को बहुत ही पेचीदा बताया गया जो आम लोगों के समझ से बाहर है। यही कारण है कि देश की जनता वित्त मंत्रालयसे नाखुश है जिसकी वजह से आरएसएस के सर्वे में इस मंत्रालय के खिलाफ लोगों ने अपनी प्रतिकिरिया दी।

  • अरुण जेटली का स्वास्थ्य:

पिछले काफी दिनों से ये देखा जा रहा है कि अरुण जेटली अपने स्वस्थ को लेकर परेशान हैं। अभी हाल ही में उन्होंने किडनी से सम्बंधित अपन इपरेशानी का इलाज देश के सबसे बड़े अस्पताल AIIMS करवाया। इलाज के दौरान अरुण जेटली को उनके मंत्रालय से फिलहाल हटाया गया है और ये जिम्मेदारी अब पियूष गोयल को दी गई है। ऐसे में स्वास्थ्य को एक मुद्दा बना कर आरएसएस भाजपा द्वारा अरुण जेटली को मंत्रालय से दरकिनार कर सकती है।

  • सोशल मीडिया पर जेटली की प्रतिक्रिया:

सोशल मीडिया जैसे बड़े प्लेटफार्म का देश में किसी ने खूब प्रयोग किया है तो वो है 2014 से बनी भाजपा सरकार। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर के भाजपा के सभी बड़े नेता फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल प्लेटफार्म पर खूब एक्टिव रहते हैं। मगर वित्त मंत्री अरुण जेटली सोशल मीडिया जैसे बड़े प्लेटफार्म का इस्तेमाल करने में थोडा सा चुक गायें हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कोई खास ऐसी पकड़ नहीं बनाई जो भाजपा के अन्य नेताओं ने बनाई है। जो कही ना कही अरुण जेटली को दरकिनार करने में एक मुद्दा बन सकता है। भाजपा अब युवा और एक्टिव नेताओं के मौका देने में लगी हुई है ऐसे में अरुण जेटली के मंत्रालय को लेकर भाजपा विचार कर सकती है।

नोटबंदी और जीएसटी जैसे बड़े फैसलों का फेल हो जाना और अरुण जेटली के स्वास्थ्य और उनकी सोशल मीडिया से दुरी को देखते हुए आरएसएस के दबाव में आ कर भाजपा अरुण जेटली को उनके मंत्रालय से हटाने की कोशिश कर सकता है। क्योंकि आरएसएस किसी हाल में भाजपा को 2019 लोकसभा चुनाव में हर नहीं देख सकता। इसके अलावा अमित शाह और नरेन्द्र मोदी की रणनीतियां कोई भी और कभी भी बड़ा फैसला ले सकती है।

इस खबर में आज हमने आपको आरएसएस की लिस्ट का दूसरा नाम और उसे मंत्रालय से हटाने का कारण बताया मगर कौन है कौनसा है वो तीसरा नाम जो आरएसएस को खटक रहा है। उसको जानने के लिए आपको हमारे साथ जुड़े रहना होगा।

Sourav Shukla

Sourav Shukla is an Indian Journalist. He is an alumni of ISOMES News 24.

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