जानें क्यों भारत सरकार ज्यादा मात्रा में नहीं करती है नोटों की प्रिंटिंग

पूरे विश्व में हर तरफ गरीबी जरूर है चाहे वह कितना भी समृद्ध देश क्यों ना हो हर तरफ लोगों के पास पैसों की कमी जरूर रहती है।देश गरीब है इसका मतलब क्या है इसका मतलब है कि देश के पास राजकोष में भारी कमी आ जाती है।और देश के नागरिकों के पास कम पैसा है रहता है।जब जब देश में गरीबी की खबरें आती है तभी से कुच लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि देश की करेंसी भी अपनी ही है औऱ देश की प्रिंटिंग प्रेस भी अपनी ही है तो फिर देश की सरकार मनचाहा पैसा छापकर देश में गरीबी क्यों नहीं खत्म कर सकती और देश में सभी लोगों को धनवान क्यों नहीं बना देती?

यह सवाल वाजिब है लेकिन किसी भी देश की सरकार ऐसा भयानक कदम नहीं उठा सकती क्योंकि अगर सरकार ने ऐसा कदम उठाया तो देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है और देश की करेंसी की वैल्यू विदेशी करेंसी के सामने कम हो जाती है और जिसके कारण हमारे देश में महंगाई और भी ज्यादा बढ़ जाएगी  क्योंकि देश को विदेशी चीज़ों के लिए ज्यादा से ज्यादा पैसे देने पड़ेंगे।

किसी भी देश की मुद्रा के पीछे सोना या चांदी जैसा कोई बहुमूल्य धातु नही रखा जाता। 1971 में ब्रिटेन वुड व्यवस्था खत्म होने के साथ ही गोल्ड स्टैंडर्ड का भी अंत हो गया। अब विभिन्न देशों की मुद्रा की तरह रुपये को फिएट करेंसी कहा जाता है। फिएट करेंसी कानूनी तौर पर मान्यता प्राप्त मुद्रा होती है जिसे सरकार का सहारा होता है। फिएट लैटिन भाषा से लिया गया शब्द है। हिंदी में इसका मतलबा आज्ञा या हुकुम होता है।

अब सवाल ये है कि कितना नोट छापा जाए या कितने सिक्के ढ़ाले जाएं? जहां तक बात नोटों की है, 1 रुपये को छोड़ बाकी कीमत वाले नोटों के बारे में रिजर्व बैंक आर्थिक विकास दर, महंगाई दर और नोटों की बदलने की मांग जैसे तथ्यों के आधार पर अनुमान लगता है, फिर सरकार के साथ विचार-विमर्श कर तय होता है कि कितना नोट छपेगा।

यह तो हो गया की रुपया कैसे छपता है लेकिन अगर मानलों कि किसी देशख की सरकार ने सभी लोगों के खाते में 1 करोंड़ रुपये जमा करवा दिये तो सभी लोग अमीर हो जाएंगे। और आप अब आपके मन में ख्याल आएगा की ‘अब तो मै धनवान हो गया हूं, अब मै जो चाहूं खरीद सकता हूं’… और आप सिधे शॉपिंग के लिए निकल पडते हैं।

ठीक यही विचार हर कोई करेगा। अचानक वस्तूंओ की मांग बढेगी, क्योंकि – अब हर किसीके पास पैसे होने के कारण हर कोई खर्चा करने के लिए उत्तेजित होगा। पर इसी समय, हमारे देश में वस्तुओं के दाम और भी ज्यादा बढ़ जाएंगे।

कल्पना करें की आपको घर लेना है। पहले उस घर की कीमत थी 30 लाख रुपये। पर तभी आपके पास पैसे नही थे। पर अब सरकार की तरफ से 1 करोड रुपये मिलने की वजह से आप सीधे उस बिल्डर के पास पहुंचे और – आप देखते हैं की आपकी तरह हजारों लोग उसके घर के बाहर खडे हैं…!

हर कोई चिल्ला रहा है ‘मुझे घर दो।। मुझे घर दो।।!’

इतनी भीड़ देखकर बिल्डर तो डर जाता। लेकिन एक ही घर के लिए हजारों लोग लड़ रहे देख वह खुश होता है और सीधे घर की कीमत 75 लाख कर देता है।

इस उदाहरण से आप बाजार की हर वस्तू की भयानक मात्रा में बढ़ने वाली कीमत का अंदाजा लगा सकते हैं।क्योंकि बाजार का नियम है कि जिस चीज की मांग जितनी ज्यादा होगी, उसकी कीमत उतनी ही ज्यादा होगी।तो अगर भारत सरकार रुपयें को भारी मात्रा मैं प्रिंट करके देश के हर गरीब को पैसे दे देगी तभी भी वह गरीब ही रहेगा अमीर नहीं क्योंकि महंगाई इतनी बढ़ जाएगी की वह इतने पैसों के बाद भी कुछ नहीं कर पाएगा।

तो सरकार द्वारा ज्याद नोट प्रिंट करने से कुछ नहीं होगा अगर गरीबी दूर करनी है तो हमें विश्व बाज़ार में अपने नोट की वैल्यू बढ़ानी पड़ेगी और वह तभी बढ़ेग जब हमारे देश के प्रोडक्ट की मांग बढ़ेगी और इसके साथ ही हमारी करेंसी की भी मांग बढ़ेगी।

 

 

 

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