योगी ने यूपी में मरते बच्चों पर कसे तंज

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खबर_संवाददाता - Deepak

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उत्तर प्रदेश के सीएम अपने बयानों से सीध करने में लगे हुए है की वो किसी प्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं किसी एक विचारधारा से जुड़े लोगों के या यूं कहे तो किसी एक पार्टी के सीएम है। योगी आदित्यनाथ जिस प्रदेश के सीएम है उस प्रदेश की आबादी 18 करोड़ है। और इन 18 करोड़ की आबादी वाली प्रदेश में बच्चे से बूढ़े तक रहते है ,हिन्दू से मुस्लमान तक रहते ,पुरुष से महिलाएं तक रहती हैं, लेकिन यूपी के सीएम को इन सब चीज़ो से कुछ लेना देना नहीं है। अपने भाषण में अपनी नाकामियों का भांडा आम लोगो पर फोड़ने में लगे हुए है। जिसका तजा उदहारण उनका लखनऊ दिया गया सीएम योगी का नया भाषण है।          

 

गोरखपुर के बीआरडी कॉलेज में हुए बच्चों की मौत के बाद योगी आदित्यनाथ सवाल के घेरे में आ गये थे जिसके बाद योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में बयान आता है की " मुझे लगता है कहीं ऐसा न हों कि लोग अपने बच्चों को दो साल के होते ही सरकार के भरोसे छोड़ दें, सरकार उनका पालन पोषण करे। उन्होंने ये भी कहा था कि "लोगों की आदत होती है की वह हर काम के लिए सरकार के भरोसे रहते है, मीडिया कहती है कि यहाँ देखिए कूड़ा पड़ा  है ,हम लोग मानते हैं कि सरकार की जिम्मेदारियाँ हैं  पर लोगो को लगता है हम सारी जिम्मेदारियों से मुक्त हो गए हैं"।

 

संविधानिक पर बैठ कर असंविधानिक काम     

योगी आदित्यनाथ को संविधानिक पद पर बैठ कर हर गैर संविधानिक काम करने में लगे है।आपको बता दें की खुद संविधान की के भाग चार में अनुच्छेद 47 में लोक स्वास्थ्य में सुधार करने को राज्य का कर्तव्य बताया गया है। इन सब मुद्दों पर कोई सवाल नहीं उठाया जा रहा हैं। क्यूंकि देश में फिलहाल कोई मजबूत विपक्ष नही है। और अगर विपक्ष कोई सवाल उठाने की कोशिश करते है तो उनको योगी जी का ये कह देते है कि गोरखपुर को पिकनिक स्पॉट न बनाया जाए, ये मासूम बच्चों की मौत पर राजनीति की रोटियां।

 

और मौजूदा योगी जी का बयान ये साबित करता है की देश में गरीब और आम जनता की जान की कोई कीमत नहीं है जाहे वो ट्रेन हादसे में मारे जाए या अस्पताल में। लोग ये समझ के वोट देते है की उनकी सरकार उनके जरूरतों पर ध्यान दे पर मौजूदा योगी सरकार से ये उम्मीद नहीं लगाई जा सकती क्यूंकि उनका मानना है की लोग सरकारी अस्पताल में ना  एडमिट कराके प्राइवेट अस्पताल में एडमिट कराएं।

 अब देश की राजनीति कहें या विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की सरकार विकास के पथ पर चलकर मंदिर-मदरसा-गाय पर अटक गयी है। प्रत्येक गांव में गौशाला खोलने के आदेश जारी किए जा रहे हैं।स्टार्ट अप इंडिया की शुरुआत की जा रही है लेकिन इस न्यू इंडिया में बच्चों की जान की कोई कीमत नहीं है।