डेरे में सब्जियां बैचा करता था बलात्कारी बाबा, दाम जान कर हो जाएंगे हैरान

  • डेरे में सब्जियां बैचा करता था बलात्कारी बाबा, दाम जान कर हो जाएंगे हैरान

खबर_संवाददाता - Shaini

On 0000-00-00 00:00:00 2794

बलात्कारी बाबा को सजा मिलने के बाद से राम रहीम के डेरे की जांच की जा रही है जिसके बाद से राम रहीम के काली कर्तुतो से पर्दा उठ रहा है। अब एक और बात सामने आ रही है, कि गुरमीत राम रहीम अपने भक्तो को सब्जिया बेचा करते थे लेकिन उसके भाव सोने के भाव के बराबर होते थे।


और राम रहीम के भक्त उसपर अंधविश्वास करके उन सब्जियों को खरीदा करते थे। भक्तो की अंधभक्ति इतनी ज्यादा थी की हर भक्त की इच्छा थी की वो बाबा के बाग की सब्जी का स्वाद चखे।

 

क्या बेचा करता था?
बलात्कारी बाबा के सब्जियो के भाव आप को बेशक हैरान कर देगा। बता दे कि बलात्कारी बाबा एक हजार रुपए की हरी मिर्च, दो हजार रुपए के मटर के 10 दाने और तीन हजार रुपए का एक बैंगन अपने भक्तो को देता था। शायद दुनिया की किसी सब्जी मंडी में इतनी महंगी सब्जी नहीं बिकती होगी, जितनी राम रहीम के कुछ अंधे भक्त खरीद लिया करते थे। बता दे कि सिरसा में राम रहीम का डेरा करीब 800 एकड़ में फैला है, जिसमें खेती भी की जाती है। जिसके बाद इस बात से भी पर्दा उठा है कि राम रहीम अपने भक्तों को ये सब्जियां सोने के दाम पर बेचता था।

एक हरी मिर्च एक हजार रुपए की, वही एक छोटा बैंगन एक हजार रुपए का हुआ करता था, अगर बैंगन का साइज बड़ा हो तो दाम भी दोगुने कर दिया करते थे, यानी दो हजार हो जाते है। मटर के पांच दानों के पैक की किमत एक हजार रुपए रखी गई है जिसे भक्त खुशी खुशी खरीदते है।


घर घर तक पहुंचाई जाती थी सब्जिया?
सब्जी को भक्तो के घर तक भी पहुंचाया जाता था, भक्तों के घर पहुंचाने का जिम्मा भंगीदास का होता था। भंगीदास डेरे के वो भक्त हैं जो नाम चर्चा घर में मंच का संचालन करते हैं। ग्रामीण और शहरी नाम चर्चा घरों के भंगीदार अलग-अलग होते हैं, फिर इन दोनों के उपर ब्लॉक का भंगीदास होता है। डेरा को घर-घर से जोड़ने के लिए ही राम रहीम ने भंगीदास की यह प्रथा बनाई थी।

 

कौन खरीदता था सब्जी

इन सब को सुनने के बाद आपके मन में भी बड़ा सवाल उठता है कि आखिर वो कौन लोग है जो सोने के भाव के होते हुए भी सब्जिया खरीदने के लिए राजी हो जाते है। दरअसल राम रहीम के भक्तो की संख्ता बहुत अधिक है जो उनपर अंधा विश्वास करते है। यही बड़ा कारण है कि वे लोग सब्जियों को खरीदते थे। अंधभक्ति यहां तक थी कि हर कोई बाबा के बाग की सब्जी का स्वाद हर कोई चखना चाहता था। परिवार के एक सदस्य को भी हजारों की कीमत का मटर का एक दाना मिलता तो वो खुद को धन्य समझता। लो सोच कर खुश होता थआ कि आखिर कार बाबा के दर्शन हो गए।

 

इस तरह पहुंचाया जाता है पैसा

जानकारी के मुताबिक हफ्ते-पंद्रह दिन में एक बार डेरा सब्जी की सप्लाई गुरमीत राम रहीम का एक आदमी तक पहुंचाता था। वो उसका पैकेज बनाकर उसे डेरा भक्तों की अधिक संख्या में बेचा करता था। सब्जी से इकट्ठा होने वाला पैसा सारा डेरा मैनेजमेंट को भेजा जाता था।

भक्तों को कैसे बहला कर यह बलात्कारी अपने भक्तो को सब्जिया बेचा करता था, जो अपनी आय्याशियो में इस पैसो का इस्तेमाल किया करता था। लेकिन आज तो वो पंक्ति सच होती दिख रही है, जैसा करोगे वैसा भरोगे। पापो का घड़ा इतना भर गया है कि अब गुरमीत राम रहीम जेल की चारदीवारी के पीछे है और उसके बाग की सब्जियां तो दूर आज उसे सूखी रोटियों ही नसीब होगी।

Related News Video