1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस: अबु सलेम को हुई उम्रकैद, दो आरोपी को फांसी

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खबर_संवाददाता - Shaini

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1993 के मुंबई ब्लास्ट मामले में टाडा कोर्ट ने सजा सुना दी है। विशेष टाडा अदालत ने अपनी सुनवाई मे ताहिर मर्चेंट और फिरोज को फांसी की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अबू सलेम को उम्रकैद और 2 लाख रुपये का जुर्माना, जबकि दूसरे आरोपी करीमुल्लाह शेख को उम्रकैद के साथ 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इनके अलावा रियाज सिद्दीकी को भी 10 साल की सजा दी गई है।

कोर्ट में फांसी की सजा सुनने के बाद ताहिर मर्चेंट और फिरोज खान के परिवार वाले कोर्ट में ही गश खाकर गिर पड़े। कोर्ट ने आरोपी ताहिर को धमाकों के लिए पैसे जुटाने और कई आरोपियों को ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान भिजवाने के दोषी ठहराया था।

 

चलिए अब जानते है कोर्ट द्वारा ताहिर मर्चेंट जिसे फांसी मिली है वो कौन है

ताहिर मर्चेंट का दूसरा नाम है ताहिर तकल्या है उन्हे इस नाम से जाना जाता है। लेकिन 1993 के बम ब्लास्ट के बाद से ही ताहिर मर्चेंट फरार हो गया है और 2010 तक इनका कोई अता पता नहीं था। लेकिन साल 2010 में सीबीआई ने ताहिर को अबूधाबी से अपनी गिरफ्त में ले लिया है। ताहिर मर्चेंट याकूब मेनन का बेहद करीबी था। साल 1993 में कोर्ट ने ताहिर के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। मर्चेंट ने धमाके के बाद कई लोगों को दुबई बुलाया और वहां उसे उन्हें हथियारों की ट्रेनिंग के लिए सीधा पाक रवाना कर दिया था। मर्चेंट ने इन लोगो की पैसो के मामले में मदद की। इन लोगो के लिए पूर्ण रुप से दस्तावेज और पैसे भी उपलब्ध कराए। इसके लिए मर्चेंट ने साल 1993 ब्लास्ट की साजिश रचने के लिए पहले कई मीटिंग अटैंड की। इन मीटिंगों में याकूब मेमन और दाऊद इब्राहिम भी शामिल होते थे।

 

चलिए जानते है कि आखिर कौन है फिरोज अब्दुल राशिद खान

फिरोज अब्दुल राशिद खान को पुलिस ने नवी मुंबई से अपनी गिरफ्त में लिया था। फिरोज पर आरोप है कि वह दुबई में की गई मीटिंग में शामिल शामिल हुआ था और साजिश का हिस्सा बना था। साथ ही हथियार और विस्फोटक लाने में मदद की थी।

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