गुरु के ग्राम में छात्र की हत्या,माँ ने पूछे स्कूल से कई सवाल

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खबर_संवाददाता - Sanjeev

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हरियाणा के गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में दूसरी क्लास के मासूम की हत्या मामले में शिक्षा मंत्री प्रो. राम विलास शर्मा ने बड़ा बयान दिया है अपराध की गम्भीता को समझते हुए मंत्री महोदय ने साफ़ किया है कि इस मामले के दोषी बक्शे नहीं जायेगे  और उन पर कड़ा एक्शन होगा। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने पैसा कमाने के लिए शिक्षा का व्यवसायीकरण किया है। ऐसे स्कूलों का भंडाफोड़ होगा, जो हर विषय पर अलग-अलग फंड लेते हैं। 
 
गौरतलब है  कि शुक्रवार सुबह गुरुग्राम के रेयान स्कूल में सात साल के एक मासूम की बाथरूम में निर्दयता से हत्या कर दी गई थी। इस हत्या का आरोप स्कूल बस के 42 वर्षीय कंडक्टर अशोक तिवारी पर लगे है । पुलिस की पूछताछ में कंडक्टर ने कबूल किया है कि वह सेक्सुअल असॉल्ट नहीं कर पाया तो उसने बच्चे की हत्या कर दी। कंडक्टर अशोक ने कहा उसकी बुद्धि भ्रष्ट हो गई थी। उसे डर था कि बच्चा किसी को उसकी इस हरकत के बारे में न बता दें। वहीं, दूसरी ओर मामले में स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया गया है। 
 
इन सब के बीच में कुछ गंभीर सवाल भी खड़े हुए है ये वो बुनियादी सवाल है जो आम लोगो के माध्यम से आज हर माता पिता और हर शुभचिंतक के शब्दों में गढ़ कर समाज,सरकार और स्कूल प्रशासन सभी से पूछना जरुरी है 

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माँ का स्कुल प्रशासन से सवाल

कुछ सवाल जो दुखी माँ स्कुल प्रशासन से पूछना चाहती है कि सुरक्षा के नाम पर मैंने लाखो की फीस भरी है अच्छी परवरिश और ऊंची शिक्षा के लिए जीवन के हर संघर्ष का सामना मेरे परिवार ने किया लेकिन अब उसका बेटा जो इस दिखावे की भेट चढ़ा है वो कैसे वापस आ सकता है ? आप ने जो माँगा हमने पेट काट कर सब पूरा किया आप वसूलते रहे हम भरते रहे लेकिन जब मेरे लाडले का गाला कटा गया तब उसकी चीख क्या किसी ने नहीं सुनी? आप की हर आवाज़ हमारी  सर आँखों पर थी फिर आप की आंखे सी सी टी वी के रूप में उस जगह से क्यों हट  गयी जहा मेरे लाल के खून से जमीन  लाल थी आप तो शिक्षा का मंदिर है आप के यहाँ चाकू जैसा हथियार कैसे आ गया और आखरी सवाल मेरा जिगर का लाल जब लहू लुहान था तब भी आप की शिक्षा का मंदिर योही चलता रहा जब तक बाथरूम से खून के धब्बे नहीं मिटे। माँ के इन सवालो ने स्कुल की कार्यशैली पर तो सवालिया निशान लगा ही दिए है साथ में सभी को सोचने पर ज़रूर मज़बूर किया है कि क्या उनका जिगर का टुकड़ा इस दौर के शिक्षा की दुकानों में सुरक्षित है ?

शुभचिंतको का सरकार से सवाल 
 
आज सभी जगह मासूम की स्कुल में हुई हत्या चर्चा का विषय बनी हुई है।  सरकार भी अब बड़े बड़े दावे कर रही है, सरकार के दावों से उलट अगर इतिहास खंगाले तो नज़र आता है कि इस हिन्दुस्तान में प्रद्युम्न पहला नहीं है उस जैसे कितने मासूम जो आज भी अपने न्याय के लिए सरकारी फाइलों के पन्नो से पुकार रहे है लेकिन सरकारी तंत्र के दीमक ने उनकी आवाज़ को कही अँधेरी गुफा में छुपा रखा है और प्रद्युम्न जैसी घटना के बाद कुछ एक खबरों में कही उनका जिक्र कर के उनके परिवार वालो में न्याय की आस  को जिन्दा रखा जाता है। अब ये सवाल सरकार से लाज़मी हो गया है कि आखिर कब तक उस पुरानी परम्परा को जिन्दा रखा जाये गा डिजिटल इंडिया के इस दौर में फाइलों  से ज्यादा सरकार के तुरंत एक्शन के प्लान को सब सुनना चाहते है। हर पिता आज सरकारी तंत्र से जरूर पूछना चाहता है कड़ी कार्यवाही होगी को तुरंत सार्थक होते वो कब देख सकता है?

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समाज का खुद से सवाल

प्रद्यूम्न की दर्दनाक मौत के बाद सभी अपने दिल से दर्द का अहसास करा रहे है लेकिन क्या इतने मात्रा से उस परिवार का गम हल्का होगा नहीं तो क्यों न हम सभी आज से प्रण करे कि उन शिक्षा की दुकानों का  सरकार की कार्यवाही से पहले हम ही बहिष्कार करेगे, जिसमें फीस केवल स्कुल मालिकान के आर्थिक मज़बूती न दे बल्कि सुनिश्चित करे कि संस्थान किसी को भी  नौकरी पर रखने से पहले उसकी जांच सही तरह से करवाएगा, स्कुल का हर कोना सुरक्षित तो जिससे हमारे लाडले को कभी किसी की बुरी नज़र न लगे।