हिंदी दिवस स्पेशल: आखिर हिंदी भाषा क्यों हो गई रेस में पीछे...

  • हिंदी दिवस स्पेशल: आखिर हिंदी भाषा क्यों हो गई रेस में पीछे...

खबर_संवाददाता - Shaini

On 2017-09-14 16:15:23 3313

कम्प्यूटर के युग के इस दौर में,

थोपी जा रही अंग्रेजी शोर में।

 आधुनिकता की कहते इसे जान,

छीन रहे हैं हिन्दी का रोज मान।

यह पंक्ति साफ बयां कर रही है आज इस मॉडर्न दौर में हिंदी की महत्वता कम होती जा रही है। इस युवा पीढ़ी मे युवा को लगता है कि अगर उन्होने आंग्रेजी बोलना या लिखना सीख लिया तो वो आज के इस दौर के महान व्यक्ति है। युवा पीढ़ी ही नहीं बल्कि आज का माहौल भी दिखावे की होढ़ के पीछे है, समय बीतने के साथ हर एक शख्स कोशिश कर रहा है कि वो हिंदी की कुछ पंक्ति भूल कर अंग्रेजी की पंक्ति रट ले।

 

अंग्रेजी के बड़े बाजार में, हिन्दी पाठकों की संख्या कम हो रही है या यू कहे अंग्रेजी के कुछ अक्षर के सामने ही हिंदी की रफ्तार धीमी हो गई है। मेट्रो या भरे बाजार में चले जाओ आम जनता तक अंग्रेजी में पटर पटर करते दिखेंगे... हिंदी के कुछ बोल अगर मुंह से निकल गए तो चेहरा छिपाने के लिए बचते है। कहने का मतलब ये है कि बुक शॉप्स में भी अंग्रेजी की किताबों से भरी अल्मारियों के बीच हिन्दी की किताबें कहीं दूर कोने में धूल फांक रही है।

 

हिंदी के लिए समाज ही नही बल्कि हमारा मनोरंजन प्लेफार्म बॉलीवुड फिल्मे भी जाहिर करती है कि आज के दौर ने पूरी तरह से करवट बदल ली है, अब अंग्रेजी की लाईन लगाकर खड़े हो गए कि कब वो चंद अक्षर सिख कर या अंग्रेजी समाज में ढलें और दिखावे की दुनिया में अपना अगला कदम बढाए।

 

बॉलीवुड फिल्मो में हिंदी बोली तो जाती है लेकिन समाजिकृ-संकृतिक रुप से वो पूरी अंग्रेजी की चाल होती है। जिसमे वो लोगो को भी अंग्रजी बोलने के लिए पलड़ा भारी करती हुई नजर आती है। कही ना कही इन फिल्मो का भी बड़ा हाथ लेकिन हिंदी को मिटाने वाले वो लोग है जो इसका पालन कर रहे है।

 

सिर्फ 14 सितम्बर को ही करते है

अपनी राष्टृ भाषा का सम्मान

14 सितंबर को भारत में हिंदी दिवस मनाया जाता है। लेकिन हिंदी को याद करने के लिए सिर्फ 14 सितंबर ही क्यो? यह सवाल आपको मन मे भी जरुर आता होगा.. 14 सितंबर इसलिए, क्योंकि 1949 में इसी दिन संविधान सभा ने हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया। 26 जनवरी, 1950 को लागू संविधान में इस पर मुहर लगाई गई थी। संविधान के अनुच्छेद 343 के तहत देवनागरी लिपी में लिखी जाने वाली हिंदी को सरकारी कामकाज की भाषा के रूप में मान्यता दी गई।

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हिंदी दिवस पर रखा गया समारोह

लायंस क्लब दिल्ली प्रभात द्वारा 9 सितम्बर ,2017 को हिंदी दिवस एवं शिक्षक दिवस का आयोजन गोल्डन स्पून बेंक्वेट  हॉल आई.पी. ऐक्सटन , पटपरगंज में  बड़ी  धूमधाम से किया गया।  इस अवसर पर क्लब की ओर से सुप्रसिद्ध हास्य कवि एवं दिल्ली सरकार द्वारा सम्मानित शिक्षक श्री सुनहरी लाल वर्मा तुरंत, संस्कार चैनल की सुप्रसिद्ध एंकर  सुश्री नेहा शुक्ला को भी हिंदीभाषा के प्रति अपने बहुमूल्य योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

 

 

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अतिथियों ने अपने अनुभव को किया साझा

कार्यक्रम की शुरुवात क्लब के अध्यक्ष श्री नीरज बंसल ने सभी उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया । कार्यक्रम का संचालन सुश्री नीलिमा गोयल तथा दीपाली बंसल द्वारा किया गया। क्लब के सचिव लायन विकास गोयल ने इस अवसर पर क्लब द्वारा संचालित विभिन्न गतिविधियों के बारे में  जानकारी दी। सभी गणमान्य अतिथियों इस शुभ अवसर पर शॉल के द्वारा सम्मानित किया गया। श्री सुनहरी लाल वर्मा तुरंत जी ने  अपने हास्य कविताओं अपने चिरपरिचित अंदाज़ में सभी का भरपूर  अंदाज में मनोरंजन किया। वही दूसरी तरफ  ABP न्यूज़ के एंकर श्री श्रीवर्धन त्रिवेदी ने भी हिंदी भाषा से संबधित अपना अनुभव सबके साथ साझा किया। 

इस खास अवसर पर क्लब के बच्चों द्वारा क्लब के सिग्नेचर प्रोजेक्ट स्वछता से संबधित विषय पर  गांधीजी व मुन्ना भाई की भूमिकाओं को जीवंत करते हुए हास्य से भरपूर तथा प्रेणात्मक रूप में एक  संक्षिप्त नाटिका भी प्रस्तुत की गई, जिसकी सभी ने भरपूर सराहना की। सुश्री नेहा सर्वेश शुक्ला जी ने भी हिंदी भाषा के महत्त्व के बारे में बताया। साथ ही उन्होंने कार्यक्रम में भढ़चढ कर हिस्सा लिया।

 

 

 

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इन लोगो ने की शिरकत

कार्यक्रम में क्लब के पूर्व प्रांतपाल श्री नरेश गुप्ता, श्री संजीव सिंगला, श्री प्रमोद अग्रवाल ,श्री दिनेश गुप्ता, श्री विनीत गोयल, पूर्व निगम पार्षद सुश्री गीता शर्मा आदि ने भी उत्साहपूर्वक शिरकत की। कार्यक्रम के अंत में सभी आये हुए अतिथियों व क्लब  मेंबर्स को हिंदी भाषा के प्रचार एवं प्रसार हेतु सुप्रशिद्ध लेखक मुंशी प्रेमचंद ली लघु कहानियों की पुस्तक स्मृति चिन्ह के रूप में दी गई।

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