दहेज उत्पीड़न पर SC का बड़ा फैसला, रिपोर्ट सौंपेगी केंद्र सरकार

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खबर_संवाददाता - Shaini

On 2017-09-19 16:38:35 3269

देश में देहज उत्पीड़न मामला आज का सबसे बड़ा मामला है जिस पर रोजाना कोई ना कोई मामला सुनने के लिए मिलता है। इसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिनो अपना अहम फैसला सुनाते हुए कहा था कि उत्पीड़ने के मामलों में तुरंत गिरफ्तारी जरूरी नहीं है। जिसके बाद कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि कोर्ट के उस फैसले का दहेज प्रताड़ना के मामलों पर क्या प्रभाव पड़ा है। जिसके बाद केंद्र सरकार डेढ़ महीने में एक विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट बनाएगी और उन्हे को सौंपेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस साल जुलाई के महीने में दिए अपना फैसला सुनाया था और कहा कि दहेज उत्पीड़न को लेकर परिवार के सभी सदस्यों की तुरंत गिरफ्तारी ना हो। इसके बाद एक NGO मानव अधिकार मंच ने उस फैसले की समीक्षा की याचिका इस दलील के साथ लगाई कि इससे दहेज उन्मूलन कानून कमज़ोर होगा। इस याचिका की सुनवाई के दौरान जारी नोटिस किया गया था जिसके जवाब में केंद्र सरकार ने अदालत में कहा था कि वो अभी कोर्ट के आए फैसले का अध्ययन कर रही है।

 

केंद्र सरकार ने कोर्ट को कहा कि वह विचार कर रही है कि इस फैसले को सम्यक ढंग से लागू कैसे किया जाए ताकि कानून पर अमल भी कारगर हो और निर्दोष लोग भी परेशान ना हो।

 

कमजोर हुआ दहेज उत्पीड़न कानून
मानव अधिकार मंच ने मांग जारी की है कहा कि इस संबंध में दूसरी गाइड लाइन बनाने की जरूरत है। क्योंकि कोर्ट से यह फैसला आने के बाद दहेज उत्पीड़न का कानून कमजोर हुआ है। जारी की गई याचिका में नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट का हवाला भी दिया गया है। रिपोर्ट में साल 2012 से 2015 तक 32000 महिलाओ की मौत की वजह दहेज उत्पीड़न ही बताई गई थी।

 

हर जिले में बनाई जाएगी समिती
इस साल के जुलाई महीने में आए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आईपीसी की धारा-498 ए के तहत दहेज प्रताड़ना मामले में सीधे गिरफ्तारी नहीं होगी। दहेज प्रताड़ना के मामलों को निगाहों में रखने के लिए हर जिले में एक परिवार कल्याण समिति बनाई जाए। गिरफ्तारी का आधार समिति की रिपोर्ट हो, रिपोरेट में सारे दावे के बाद ही गिरफ्तारी होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना मामले में चिंता जताते हुए फैसला सुनाते हुए लीगल सर्विस अथॉरिटी से कहा है कि सभी जिले में परिवार कल्याण समिति बनाई जाए। इन समितियों में समाज के प्रभावशाली गणमान्य लोग भी शामिल किए जाएं ताकि पूरे मामले को निष्पक्ष रूप से समझा जाए। अगर किए गए दावे सच होंगे तो उस पर पूरी तरह से कार्रवाई की जाएगी।