केंद्र सरकार के विरोध के बावजूद यह लोग खड़े है रोहिंग्या मुसलमानो के समर्थन में

  • केंद्र सरकार के विरोध के बावजूद यह लोग खड़े है रोहिंग्या मुसलमानो के समर्थन में

खबर_संवाददाता - Shaini

On 2017-09-22 14:56:59 2825

रोहिंग्या मुसलमानों के आने से चारो तरफ एक चर्चा का विषय बन गया है, रोहिंग्या को वापस म्यांमार भेजने के मामले में मानवाधिकार आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी एक बहस का मु्द्दा बन गया है। मानवाधिकार आयोग के कार्यक्रम में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इस मामले में साफ शब्दों मे कहा कि रोहिंग्या मुसलमानों को वापस वही भेजा जाएगा जहा से वो आए है। इसकी बड़ी वजह पहले तो यह है कि इस देश के संसाधनों पर पहला और वाजिब हक यहां के नागरिकों का है। खुफिया रिपोर्ट भी इनकी तरफ से की गतिविधियों की तस्दीक करती हैं।

 

रोहिंग्या मुसलमानों के मानवीय अधिकारों की करुंगा हिमायत 

इस पर मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस एचएल दत्तू ने जवाब में रोहिंग्या के लिए आवाज उठाते हुए कहा कि आयोग रोहिंग्या मुसलमानों के मानवीय अधिकारों की हिमायत में सुप्रीम कोर्ट तक पहल करेंगा। पक्षकार भी बनेगा और ये भी कहेगा कि वापस भेजने से पहले इनको सुरक्षा प्रदान करें साथ यह सुनिश्चित किया जाए की इनका जीवन सुरक्षित रहेगा। सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इस मामले में गुहार लगाई कहा कि म्यांमार में बढ़ते मौजूदा हिंसक हालात को देखते हुए रोहिंग्या मुसलमानों के बच्चों और उनकी मांओं को वापस रवाना ना किया जाए। यह फैसला उनके बच्चो के लिए उचित रहेगा।

 

आयोग की अध्यक्ष अनन्या चक्रवर्ती की ओर से कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया कि राज्यभर में रोहिंग्या बस्तियों के अलावा 44 बच्चे शेल्टर होम और सुधार गृहों में रह रहे हैं। इनमें से शेल्टर होम में 24 और सुधार गृह में 20 बच्चे रह रहे हैं। अवैध रूप से भारत में रहने के आरोप की वजह से बच्चो को सुधार घरों में रहना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य की रोहिंग्या बस्तियों में रहने वाले बच्चों का अब तक कोई सर्वेक्षण नहीं कराया जा सका है। उन्होने आगे इनके पक्ष में कहा कि बच्चे आतंकवादी नही बल्कि भविष्य है। कुछ लोगो की वजह से और लोगो को आरोपी करार दिया है। और इस हालातो में बच्चो को वापस भेजना मौत के करीब भेजने का काम होगा।