गुलबर्ग सोसायटी केस: मोदी को आरोप बनाने की थी मांग, दायर की गई याचिका खारिज

  • गुलबर्ग सोसायटी केस: मोदी को आरोप बनाने की थी मांग, दायर की गई याचिका खारिज

खबर_संवाददाता - Shaini

On 2017-10-05 14:34:33 2826

गुजरात के गुलबर्ग सोसाइटी दंगा मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीनचिट को चुनौती देने वाली याचिका हाईकोर्ट में खारिज हो गई है। ये याचिका 2002 के दंगों में मारे गए कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी की बीवी जाकिया जाफरी ने दायर की थी। साथ ही हाई कोर्ट एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। 3 जुलाई को इस पर सुनवाई पूरी कर ली गई थी। हाईकोर्ट में लगाई गई याचिका में निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई है। लोअर कोर्ट ने एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए मोदी के साथ 56 आरोपियों को क्लीनचिट दे दी थी।

बता दें कि रिव्यू याचिका फाइल करने वालों में जाफरी तो शामिल ही थी लेकिन उनके अलावा सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ का एनजीओ "सिटिजन फॉर जस्टिस एंड पीस" भी शामिल है। दायर की गई याचिका में आरोप लगाया गया था कि इन दंगों के पीछे बड़ी साजिश है।

मोदी के साथ 59 लोग को आरोपी बनाए जाने की मांग
याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि इस शुरु से एक एक मामले में जांच होनी चाहिए। याचिका में मोदी के साथ 59 अन्य को दंगों को लेकर आपराधिक साजिश रचने का आरोपी बनाये जाने की मांग की गई है। याद दिला दे कि 28 फरवरी, 2002 को गुजरात के गुलबर्ग सोसायटी में भीड़ ने जाफरी के साथ करीब 68 लोगों की हत्या कर दी थी।

याचिका दायर करने के बाद गुलबर्ग मामले की सुनवाई साल 2009 में शुरू हुई थी, उस समय इस मामले में 66 आरोपी थे। इनमें से चार की पहले ही मौत हो चुकी है। कोर्ट ने जिन 36 आरोपियों को बरी किया उनमें बीजेपी का पार्षद भी शामिल है। दंगे में मारे गए कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जाकिया जाफरी ने कहा कि वह इस दिन का लंबे समय से इंतजार कर रही थीं। उन्होंने कहा कि उन्हे इस बात की बहुत खुशी है कि आरोपी को अब जाकर सजा मिलेगी।


जान ले क्या है गुलबर्ग सोसाइटी नरसंहार?

गोधरा कांड के अगले दिन यानी 28 फरवरी 2002 को अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसाइटी में एक दंगा हुआ था। इस दंगे में कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी की भी भीड़ नमें मौत हुई थी। जाफरी समेत 69 लोगों की जान गई थी।