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International Womens Day : तुम हो तो हम है …

8 मार्च को अंतरराष्ट्रिय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका इतिहास रूस की क्रांति से जुड़ा हुआ है। रूस की क्रांति के बाद 8 मार्च 1917 को पहली बार महिलाओं मताधिकार मिला जिसके बाद तमाम कम्युनिस्ट और समाजवादी देशो में 8 मार्च बतौर महिला दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। आगे चल कर संयुक्त राष्ट्र ने साल 1975 में 8 मार्च को बतौर अंतरराष्ट्रीय  महिला दिवस घोषित किया।  तब से पूरी दुनिया में इस दिन दो अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

लेकिन यह बात हमे समझना होगा की बस 8 मार्च को महिलाओं के लिए अंतरराष्ट्रिय दिवस मानने से हम उन्हें सम्मान दे देंगे। हमे महिलों के सम्मान से ज्यादा बराबरी की बात करनी चाहिए। ये असल सच्चाई यह है कि महिलाएं है तो हम है। उनके बिना न ये संसार कभी आगे बढ़ पायेगा न हम। फिर भी आलम यह है की हर एक सेकेंड किसी न किसी महिला को किसी न किसी से प्रतारित किया जाता है।

इसका ताजा उदहारण हमें #meetoo मूवमेंट से पता चलता है। जब माहिलाओं ने सामने आकर अपने साथ काम के दौरान होने वाले शोषण को लेकर खुलकर बोला।  महिलाओं ने बताया की उनके साथ ओफ्फिस से लेकर काम के बीच किस तरह सेक्सुअल कमेंट से लेकर यौन शोषण तक किये गए। इसके बाद हम ऐसे लोगों के बारे में जाने जो महिलाओं के खिलाफ कितनी भद्दी सोच रखते है।
आज भले ही हम 21वीं सदी में आ गये हों लेकिन आज भी महिलों को उनके अधिकारों से कही न कही हम वंचित रखते है। अगर हमें ससंद को ही ले तो जहां ओपचारिक तौर पर 50% महिलाओं का नेतृत्व होने चाहिए वहां महज 11।8% है। जोकि महज 66 सीट है। वहीँ राज्यसभा की बात करे तो महज 11% महिला सांसद है।

अगर दुनिया भर के संसदों की बात करे तो पूरी दुनिया में महज 22% ही महिलाओं का नेतृत्व है। महिलों के नेतृव की बात की जाए तो 193 देशो की सूचि में भारत 148 स्थान पर आता है। जबकि इस लिस्ट में अफ़्रीकी देश रवांडा 61% महिलओं के नेतृत्व को लेकर टॉप पर है।  
 
2014 आम चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वादा किया था की लोकसभा से लेकर विधानसभा में 33% महिलाओं को आरक्षण दिया जाएगा। लेकिन इस वादे पर आज तक न बहस हुए न बिल पेशा किया गया। यहां तक क्विपक्षी दलों ने भी इस बिल के ऊपर सरकार को समर्थन देने का आश्वासन दिया है। लेकिन फिर सरकार के कान पर जूं  तक नहीं रेंग रही।सरकार भले ही कितनी बार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा दिया हो लेकिन असल मायने में यह संभव तब ही हो जब महिलाऐं महज किसी की माँ , बेटी , बहन और बीवी तक सिमित न रहे। आगे आये और विभिन छेत्रों में नेतृव करे।

 
 
                            
 
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Deepak Prakash

Deepak Prakash is an Indian Journalist. He is an alumni of ISOMES News 24. with more than one year of experience in digital media. he had worked For many media Houses including Broadcast channels and has been always associated to News 24 . currently he heads the Sports and international desk for Khabarinfo .