संविधान पीठ लेगी AMU को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा देने का फैसला

उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे को खत्म करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट मे महत्वपूर्ण फैसला लिया। कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे 7 जजों की बेंच को रेफर कर दिया। अब एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर सात जजों की पीठ फैसला लेगी। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए ये फैसला सुनाया।

सुप्रीम कोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा देने का मसला मंगलवार को सात सदस्यीय संविधान पीठ को सौंप दिया। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एल। नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने शिक्षण संस्थाओं को अल्पसंख्यक दर्जा देने के लिए मानदंड परिभाषित करने का मुद्दा संविधान पीठ को सौंपा।

भाजपा ने में मोदी सरकार की अगुवाई में एनडीए की सरकार बनने के बाद साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा कि वो यूपीए सरकार द्वारा दायर अपील को वापस लेगी। मोदी सरकार ने कहा कि साल 1968 में पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने अजीज बाशा केस में फैसला सुनाया था कि एएमयू केंद्रीय विश्वविद्यालय है ना कि एक अल्पसंख्यक संस्थान।

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