क्या समलैंगिकता अपराध ,फिर होगा इस पर विचार

  • क्या समलैंगिकता अपराध ,फिर होगा इस पर विचार

खबर_संवाददाता - Preeti

On 2018-01-08 18:57:16 48

हाल ही सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध बताने वाली धारा 377 पर एक बार फिर से चर्चा करने पर विचार किया है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय जजों की बेंच में इस समलैंगिकता अपराध पर पुनर्विचार करने का फैसला लिया है और साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजकर इस पर जवाब मांगा है। और इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखने को कहा है।

बता दें सुप्रीम कोर्ट में एलजीबीटी (समलैंगिक) समुदाय के पांच सदस्यों ने इस मामले में याचिका दायर की थी। कि वे अपने प्राकृतिक यौन पसंद की वजह से पुलिस के डर में जी रहे हैं। उन्होंने याचिका में दलील दी है कि दो लोगों के बीच शारीरिक संबंध क्या अपराध हैं और इस पर बहस की जरूरत है। अपनी इच्छा से किसी को चुनने वालों को डर के माहौल में नहीं रहना चाहिए। 

एलजीबीटी कार्यकर्ता अक्काई ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए इस फैसले पर खुशी जताई है। 

बता दे कि भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत समलैंगिक यौन संबंध यानि पुरुष और पुरुष व महिला और महिला के बीच बनाए गए यौन संबंध अपराध की श्रेणी में आते हैं। नाज फाउंडेशन मामले में दिए फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट ने 377 को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था। लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को गलत बताते हुए समलैंगिकता को अपराध करार दिया था।