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आखिरकार सीएम की रेस में ‘कमल’ से क्यों पीछे रह गए ‘महाराज’ ?

अभी हाल ही में चुनावों के नतीजे आ चुके है और इन नतीजों मेंअगर हम मध्यप्रदेश की बात करें तो यहां पर कांग्रेस का 15 सालों का वनवास खत्म हो चुका है और इस वनवास के खत्म होनें के बाद कांग्रेस के सामनें एक बड़ी चुनौती यह खड़ी हो गई के आखिर मध्यप्रदेश में सीएम बनाए तो बनाए किसकों युवा नेता  और माधवराज सिंधिया के पुत्र ज्योतिरादित्यसिंधिंया को या फिर अनुभवी विधायक कमलनाथ को लेकिन इस दुविधा नें विक्राल रूप तबले लिया जब सिंधिया और कमलनाथ के सपोर्टर्स एक दूसरे से भिड़नें लगे और सीएम काचुनाव विधायकों की लंबी मीटिंग के बाद भी नहीं हो पाया और इसी के चलते लगातार हरतरफ तनातनी चल रही थी और आखिरकार अंत में राहुल गांधी के पास फैसला गया और राहुलगांधी नें इस रेस में सिंधिया की बजाए कमलनाथ को चुन लिया है आखिर जब विधायक दल सिंधिया को पसंद कर रहा था तो राहुल गांधी नें आखिरकार कमलनाथ को क्यों चुना?

ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस ने यह फैसला आगे की रणनीति और बीजेपी से एक डर को भी ध्यान में रखकर लिया है।

ऐसी खबरें थीं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी कार्यकर्ता मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते थे और युवा की बात करने वाले राहुल गांधी उन्हें सीएम बना सकते थे,मगर ऐसा नहीं हुआ। वहीं राज्य में नवनिर्वाचित विधायक और पार्टी नेता कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे। कुर्सी एक और दावेदार दो। अब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि आखिर दो दावेदारों में से किसे राज्य का मुखिया बनाया जाए, जिससे बीजेपी को किसी तरह से बाजी पलटने से रोका जा सके। इसलिए कांग्रेस पार्टी ने इस फैसले की घड़ी में युवा जोश के बदले अनुभव को तरजीह दी। वैसे भी मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री के नाम पर युवा जोश बनाम अनुभव की ही लड़ाई थी। 

ऐसा माना जा रहा है कि सोनिया गांधी ने राहुल गांधी को ‘अनुभव’ पर भरोसा करने केलिए कहा है, क्योंकि यहां जीत काफी कम अंतर से मिली है और एक मंझा हुआ राजनेता ही उस स्थिति से अच्छी तरह निपट सकता है। इसके पीछे तर्क यह भी दिए जा रहे हैं कि जीत का अंतर कम होने की वजह से बीजेपी कभी भी बाजी को पलट सकती है। हालांकि, यह भी सच है कि बीजेपी 2019 लोकसभा चुनाव से पहले ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी जो उसकी छवि को नुकसान पहुंचाए। बावजूद इस के काग्रेस कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है। यही वजह है कि कांग्रेस ने कमलनाथ परज्यादा भरोसा किया, क्योंकि कमलनाथ के पास ज्योतिरादित्य सिंधिया से ज्यादा अनुभव है और वह सियासत की बारीकियों को काफी करीब से समझते हैं। 

बताया यह भी जा रहा है कि अगर कांग्रेस के भीतर बीजेपी का डर नहीं होता तो वह ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम पर मुहर लगा सकती थी। मगर उसे डर था कि कम अंतर से जीत के कारण बीजेपी कहीं कोई रणनीति न बनाए और कांग्रेस को सत्ता से दूर करने की कोई चाल न चले। क्योंकि कांग्रेस ऐसा मान रही है कि अगर ऐसी स्थिति राज्य में उत्पन्न होती तो फिर कमलनाथ से बेहतर शख्स कोई नहीं हो सकता जो मुश्किल हालात को आसानी में बदल दे। यही वजह है कि अनुभव के आधार पर कमलनाथ को सीएम की कुर्सी दी गई। 

इसके पीछे और भी कई कारण हो सकते है क्योंकि ज्योतिरादित्य सिंधिया को आक्रामक नेता माना जाता है और उन्होंनें अपनें इस रवैये को कंट्रोल करने की कोशिश तो की है लेकिन उन्हें अभी शायद और भी ज्यादा मेहनत करने की जरुरत है और यह भी एक महत्वपुर्ण कारण हो सकता है कमलनाथ जैसी साफ छवि और मैंच्योर नेता को सीएम बनाने का खैर दोनों में से जो भी मुख्यमंत्री बनता वह अच्छा ही होता क्योंकि दोनों ही एक शानदार नेता है और उनकी कोई तुलना नहीं की जा सकती है लेकिन इस बार कांग्रेस नें सिंधिया को आराम का बोला है।

Siddharth Sharma

siddharth sharma is a budding journalist who has great interest in exploring himself to new trends of journalism and always bring out the new and interesting part in every news and is always dedicated to his work