जेल में कैद होने की इतनी ख़ुशी कि परिवार संग जश्न मनाते हुए पहुंचा थाने

पुलिस एक ऐसा नाम है जिससे हर आम आदमी दूर भागना चाहता है। कोई भी इंसान पुलिस की गिरफ्त में नहीं आना चाहता और न ही जेल की हवा खाना चाहता है। जब भी पुलिस के आने की भनक लोगों तक पहुंचती है तो वो वहां से नौ-दौ-ग्यारह हो जाते हैं ताकि पुलिस उनको पकड़ ना सके। लेकिन हाला ही में एक अलग नजारा देखने को मिला है. ये नजारा बड़ा ही अजीबोगरीब मामला है. जो कि गुजरात के वडोदरा से सामने आया है।

रविवार को जब पुलिस आरोपी के घर अरेस्ट वॉरंट लेकर पहुंची तो वह घर पर नहीं मिला। लेकिन कुछ समय बाद जब आरोपी को इस बारे में पता चला तो वह खुद ही सोमवार को बैंड-बाजे के साथ सड़क पर जश्न मनाते हुए पुलिस थाने पहुंच गया और अपने-आप को पुलिस के हवाले कर दिया। इस मामले में चौंकाने वाली बात ये है कि इस जश्न में आरोपी हेमंत के माता-पिता भी शामिल हुए थे। वे अपने बेटे के जेल जाने से दुःख होने की बजाय खुश नजर आ रहे थे।

दरअसल, यह पूरा मामला आरोपी हेमंत और उसकी पत्नी सुनीता का है। हेमंत राजपूत नाम के इस शख्स की शादी सुनीता से हुई थी। लेकिन शादी के बाद सुनीता हेमंत के माता-पिता के साथ नहीं रहना चाहती थी। उसने हेमंत से इस बारे में बात की और उनसे अलग घर लेने के लिए कहा, लेकिन हेमंत इस बात के लिए राजी नहीं हुआ। दोनों के बीच इस बात को लेकर खूब झगड़े होने लगे जिससे परेशान होकर सुनीता अपने मायके चली गई।

इसके बाद सुनीता ने फैमिली कोर्ट में हेमंत के खिलाफ तलाक के लिए केस दायर किया और साथ ही हेमंत से भरण-पोषण लेने की मांग भी की। कोर्ट ने हेमंत को सुनीता को हर महीने 3500 रूपए भरण-पोषण देने का आदेश दिया। लेकिन हेमंत ने ऐसा नहीं किया, उसने सुनीता को पैसे नहीं दिए। जब भरण-पोषण की रकम 95,500 रूपए हो गई तो कोर्ट ने हेमंत के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी कर दिया।

रविवार को बापोड पुलिस जब हेमंत के घर अरेस्ट वारंट लेकर गई तो वह वहां नहीं मिला। इसके बाद पुलिसवालों ने उसके परिजनों से उसे थाने आने को कहा। अगले दिन हेमंत अपने दोस्तों, परिवार और पड़ोसियों के साथ जश्न मनाते, नाचते-गाते हुए थाना पंहुचा। उसके दोस्तों ने उसे फूलों की माला पहनाई और अपने कंधे पर बैठाकर उसे घर से थाने लेकर आए। हेमंत के इस जश्न की रैली को देखने के लिए वहां भीड़ जमा हो गई और आवाज सुनकर पुलिसवाले भी थाने के बाहर आ गए। इसके बाद हेमंत ने अपने माता-पिता का आशीर्वाद लिया और अपने-आप को पुलिस के हवाले कर दिया।

पुलिस ने हेमंत को कोर्ट के सामने पेश किया जिसके बाद कोर्ट ने उसे 270 दिनों तक जेल भेजने के लिए आदेश दिया। हेमंत ने अपनी बात कहते हुए कहा कि उसकी पत्नी सुनीता ने उसे और उसके माता-पिता को बहुत परेशान किया है। इसके लिए उसे जेल जाना मंजूर है लेकिन अपनी पत्नी को एक फूटी कौड़ी तक नहीं देगा। उसने कहा कि सुनीता एक अस्पताल में अच्छी नौकरी करती है और उससे ज्यादा कमा लेती है।

error: Content is protected !!