Dussehra Special : भारत के इन क्षेत्रों में नहीं होता रावण का दहन

दशहरा एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिन्दू त्यौहार है जो कि पूरे भारत के लोगों के द्वारा हर साल बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। ये कहना गलत नहीं होगा कि इस पर्व का महत्व पारंपरिक और धार्मिक रुप से बहुत ज्यादा है। दरअसल ये पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत को प्रदर्शित करता है अर्थात् पाप पर पुण्य की जीत। लोग इसे कई सारे रीति-रिवाज और पूजा-पाठ के द्वारा मनाते है। धार्मिक लोग और भक्तगढ़ पूरे दिन व्रत रखते है। वही  कुछ लोग इसमें पहले और आखिरी दिन व्रत रखते है तो कुछ देवी दुर्गा का आशीर्वाद और शक्ति पाने के लिये इसमें पूरे नौ दिन तक व्रत रखते है। दसवें दिन लोग असुर राजा रावण पर राम की जीत के उपलक्ष्य में दशहरा मनाते है। दशहरा का पर्व हर साल सितंबर और अक्तूबर के अंत में दीवाली के दो सप्ताह पहले आता है। बात अगर इस बार के दशहरा की करे तो 19 अक्तूबर को पड़ रहा।

लेकिन क्या आप जानते आज भी भारत में कई ऐसी जगह है जहां रावण का दहन नहीं किया जाता है। तो चलिए जानते है उन जगह के बारे में –

* उज्जैन:

बता दे कि उज्जैन जिले के चिखली गांव में रावण दहन नहीं किया जाता, बल्कि उसकी पूजा की जाती है। यहां ऐसा कहा जाता है कि रावण की पूजा नहीं करने पर गांव जलकर राख हो जाएगा।

* बिसरख:

यूपी के बिसरख गांव में रावण का मंदिर बना हुआ है, जहां उसकी पूजा होती है। वहा ऐसा माना जाता है कि बिसरख गांव, रावण का ननिहल था। पुराणों में बिसरख का नाम विश्वेश्वरा बताया गया है जो रावण के पिता के नाम पर था।

* मंदसौर:

मध्यप्रदेश के मंदसौर में रावण को पूजा जाता है। कहा जाता है कि मंदसौर का असली नाम दशपुर था, और यह रावण की धर्मपत्नी मंदोदरी का मायका था। इसलिए इस शहर का नाम मंदसौर पड़ा। मंदसौर  रावण का ससुराल था इसी कारण यहां रावण दहन नहीं किया जाता।

* बैजनाथ:

बैजनाथ हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले का एक कस्बा है जहां पर रावण की पूजा की जाती है। यहां के बारे में कहा जाता है, कि रावण ने यहां पर भगवान शिव की तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे मोक्ष का वरदान दिया था। इसलिए शि‍व के इस भक्त का यहां पुतला नहीं जलाया जाता ।

* आंध्रप्रदेश:

आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में रावण का मंदिर बना हुआ है, जहां भगवान शिव के साथ रावण की भी पूजा की जाती है। यहां पर विशेष रूप से मछुआरा समुदाय रावण की पूजा करता है।

* अमरावती:

महाराष्ट्र के अमरावती में गढ़चिरौली नामक स्थान पर आदिवासी समुदाय द्वारा रावण का पूजन होता है। आदिवासी अपने फाल्गुन पर्व को रावण की पूजा करके सेलिब्रेट करते हैं। ऐसा कहा गया है कि आदिवासी रावण और उसके पुत्र को अपना देवता मानते हैं।

* जोधपुर:

राजस्थन के जोधपुर में भी रावण का मंदिर है। कुछ विशेष समाज के लोग यहां पर रावण की पूजा करते हैं और खुद को रावण का वंशज मानते हैं। इस स्थान को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं।

* कनार्टक:

कर्नाटक के कोलार जिले में लोग फसल महोत्सव के दौरान रावण की पूजा करते हैं। इस लंकेश्वर महोत्सव के मौके पर भव्य जुलूस भी निकला जाता है। यहाँ लोग रावण की पूजा इसलिए करते हैं क्योंकि वह भगवान शिव का परम भक्त था। यहां पर रावण का एक मंदिर भी है।

* उत्तर प्रदेश का जसवंतनगर:

दशहरे पर यहां रावण की आरती उतार कर पूजा की जाती है और फिर रावण की मूर्ति के टुकड़े कर दिए जाते हैं।  तेरहवें दिन रावण की तेरहवीं भी की जाती है।

* दक्षिण भारत:

दक्षिण भारत में रावण को परम ज्ञानी, पंडित और शिवभक्त माना जाता है इसलिए यहां पर रावण दहन को बहुत बुरा मानते हैं।

 

Share this...
Share on Facebook
Facebook
Tweet about this on Twitter
Twitter